चिंतनीय विषय..!
हमारे देश में बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे अपने दिन की शुरुआत चाय और अखबार के साथ करते है लेकिन जब दिन की शुरुआत में ही हृदय को झकझोर देने वाली सुर्ख़ियो से सामना होता है तो वह फिर महिला हो या पुरुष दोनों के लिए चिंतनीय विषय बन जाता है कि एक ओर वो सुर्खियां ओर दूसरे ही ओर नवरात्र की धूमधाम की ख़बरें। हमारे देश में यह कितने विरोधाभास की स्थिति है कि एक ओर हम अमृत काल में विकास के नए नए संकल्प ले रहे हैं, अंतरिक्ष तक अपनी उपलब्धियों को प्रसारित कर रहे है तो वहीं दूसरी ओर आज भी देश की आधी आबादी यानी महिलाएं आए दिन जघन्य अपराधों का शिकार होती जा रही हैं। हम अंतरिक्ष तक तो पहुंच गए पर धरती पर रह रही आधी आबादी को उनकी आजादी, उनके अधिकार, उनका सम्मान उन्हें पूरी तरह नहीं दे पाए। असमंजस तो तब होता है जब हम अपनी आस पास की महिलाओं को तो सुरक्षित महसूस नहीं करा पाते उनकी असुरक्षा का कारण खुद होने के बाद भी उनको ही दोषी करार देते हैं और जब नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की बड़े आडंबर पूर्ण रूप से पूजा अर्चना करते हैं खुद के घर की महिलाओं का अनादर करके दूसरे क...