नारी तुम श्रद्धा हो..!
आज की 21 वीं सदी में जब हम महिलाओं की भूमिका की बात करते हैं तो हर क्षेत्र में हमें महिलाओं का वर्चस्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है किंतु वहीं दूसरी ओर यदि हम आज से कुछ वर्षों पहले की महिलाओं की समाज में स्थिति के बारे में पढ़ते या सुनते हैं तो हमारा खुद को सौभाग्यशाली मानना बिल्कुल तर्कपूर्ण लगता है की हम 21 वीं सदी की बेटियां हैं क्योंकि इससे पहले नारी जिस वेदना का सामना करती थीं वह ह्रदय को करुणा से भर देता है। आज समाज में नारी का जो स्थान है, हर क्षेत्र में नारी की जो योगदान है वह वर्षों पहले एक कल्पना मात्र थी। 21 वीं सदी में आज जब हम प्राचीन महिलाओं के विरुद्ध की प्रथाओं , रूढ़िवादी विचारधाराओं और महिलाओं के लिए समाज के तथाकथित नियमों और कानूनों के बारे में पढ़ते हैं तो यह हमें विचार करने के लिए मजबूर कर देता है की कैसे महिलाओं को एक मामूली मनुष्य के अधिकारों सेे भी वंचित किया जाताा था। कैसे समाज के लिए उन्हें हमेशा अपनी इच्छाओं और स्वतंत्रता का त्याग करना पड़ा। हालांकि अब परिस्थितियां बदल रहीं हैं काफी कुछ बदल भी चुका है। किंतु आज भी मानसिकता मे...