वसंत ..!

वर दे वीणा वादिनि वर दे,
पुष्पों की ताजगी सा तन मन भर दे,
नव संकल्प दे,
नव हौसले दे ,
बासंती परिधान सा तरोताजा कर दे,
नव पथ दे,
नव बुलंदियां दे,
नएपन की खूबसूरती से जीवन भर दे,
नव ज्ञान दे, 
नव धैर्य दे,
सुरों की झंकार सा नव जीवन गान दे,
नव विवेक दे,
नव बुद्धि दे,
कुसुमाकर के सौंदर्य से चेतना को भर दे,
नव गीत दे,
नव उमंग दे,
सूर्य की किरणों सा नव तेज दे,
नव शब्द दे, 
नव अर्थ दे,
बुद्धि को नव चेतना से भर दे,
नव दृष्टि दे,
नव रूप दे,
धरा के नव रूप के रस से हृदय भर दे...!

प्राची डिमरी



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