महिलाएं अपने लिए कम सोचती है..!

महिलाएं खुद के बारे में कम सोचती हैं,
जैसे वक्त सबके लिए,
अपने लिए कम,
ख़्याल सबका,
 अपना कम,
वक्त बेवक्त भी मौजूद रहती हैं सबके लिए,
पर अपने लिए कम,
उन्हें खुद पर वक्त जाया करना खर्च
और दूसरों पर जाया करना पूंजी लगता है,
उनकी प्राकृतिक रचना भले ऐसे न हुई हो,
पर उनकी मानसिक रचना ऐसे हो जाती है,
वे बहुत बोलती हैं सबसे,
पर खुद से कम,
बहुत करती हैं सबके लिए,
पर अपने लिए कम,
इस ज्यादा और कम में 
वो अपना हिस्सा ढूंढना 
हमेशा भूल जाती हैं,
वे हमेशा पास होती हैं सबके,
पर खुद से दूर, 
सुनती सबकी हैं,
पर अपनी कम,
सबकी ज़िंदगी आसान बनाती हैं,
पर खुद चैन की सांस लेने को व्यर्थ मानती हैं,
वे इस आसान और व्यर्थ के बीच,
अपने लिए ठहरना भूल जाती हैं,
अपनी बातों को अनकहा, 
अनसुना ही रहने देती हैं,
महिलाएं खुद के बारे में कम सोचती हैं..!

प्राची डिमरी



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