प्रभात

स्वच्छ नीले आकाश का 
सुर्ख लाल होना धीमे धीमे,
बादलों का यूं 
चमकना धीमे धीमे,
चिड़ियों की चहचहाट का 
स्वर बढ़ना धीमे धीमे,
रात्रि की शांति का भंग
होना धीमे धीमे,
कुछ नया रचने की कोशिश का 
आगाज होना धीमे धीमे,
जीवन का फिर से रफ्तार 
पकड़ना धीमे धीमे,
सूरज का खिड़की पर
दस्तक देना धीमे धीमे,
नई सुबह का आगाज़ होना
धीमे धीमे,
नई ऊर्जा का संचार होना
धीमे धीमे.....!

प्राची डिमरी 


Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

लेखन का आनंद:डिजिटल युग में पत्रों का महत्व।

वसंत ..!

विकसित भारत