याद..!
करने के लिए इंसान सब कुछ कर लेता है
लेकिन याद रह जाती है
अमिट छाप की तरह,
इंसान होता है खुश करता है सारे काम
पर याद फिर से विरह
की वेदना बनकर आती है,
वक्त गुजरता है इंसान संभलता भी है
पर याद उसे हमेशा याद आती है
जैसे हवा से पलट जाते है बंद पड़े पेज,
और ताज़ा हो जाते है वो पुराने सारे ज़ख्म।
काश याद होती ही न
और या फिर ज़ख्म न होते...!
प्राची डिमरी
💗💕💫💫
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