शहर के दो रूप
शहर के दो रूप होते हैं,
एक सुंदर सुव्यवस्थित और शांत,
जहां दिखती है चकाचौंद हर तरह,
जहां होता आलीशान पन हर तरफ,
जहां होता है ऐसों आराम और
जीवन की विलासिता..,
जहां व्यक्ति का सम्मान उसके अहौदे
से देखा जाता है..,
जहां मानवीय मूल्य अपनी जड़े
खोते से जाते हैं..,
जहां अपनेपन की दूर,
तक बात नहीं हो पाती है
वहीं दूसरा रूप होता है कुछ भिन्न,
वहां दिखती है जीवन की भाड़ दौड़,
जहां होती है मेहनत की बूंद हर चेहरे पर,
जहां आराम से नाता बचपन में ही टूट जाता है,
जहां मस्तियां नहीं
बचपन में ही जिम्मेदारियाँ नज़र आती हैं,
आलीशानपने से दूर यह,
छोटी छोटी झोपड़ियों में बस जाती है,
शहर के दो रूप होते हैं
और शायद जीवन के भी...!
प्राची डिमरी
You r always awesome in every field 🙌😁✍️✨
ReplyDeleteYour writing is so beautiful because you always know the right word for the right moment...😊👏✨
ReplyDeleteउम्दा 👏🙌🙂
ReplyDeleteबहुत खूब मैम🖊😊
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