विकसित भारत


जहां गांव शहर में ना हो अंतर,
नर नारी का ना हो कोई भेद,
पर्यावरण का कर सम्मान जब,
आगे बढ़ते जाए हम निरंतर..,

जहां न हो भेदभाव,
न हो कोई झूठ फरेब,
शासन माने जनता के हित
को सबसे सर्वश्रेष्ठ..,

जहां ना शिक्षा का व्यापार हो,
जहां ना हो किसी के हक पर वार,
जहां न हो धर्म के नाम पर,
मानव का मानव पर अत्याचार,

जहां हो समता और न्याय का वास,
एकता और भाईचारे का हो साथ,
जहां मिले साफ हवा और नीला आसमान
और न हो प्रकृति से कोई खिलवाड़,

जहां न हो बस शब्दों में केवल,
धरातल पर दिखे राम राज्य,
जहां न हो बच्चों का शोषण 
न हो किसी युवा के सपनों पर वार,

जहां न अन्न को कोई तरसे,
न हो जल का बर्बाद,
जहां न हो ग़रीब कोई,
न हो स्वास्थ्य सुविधाओं पर मार,

जहां हो समृद्धता की शक्ति,
समग्र विकास का हो लक्ष्य,
सतत् विकास की डोर पकड़े,
निर्मित करें विकसित भारत महान।

 प्राची डिमरी



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