जिजीविषा
जिजीविषा सीखनी है तो
सीखिए एक नन्हीं चींटी से
जो एक एक दाना करके जोडती चली जाती है।
जिजीविषा सीखनी है तो
सीखिए एक नन्हें से बीज से
जो अंदर के अंधेरे से लड़कर
धरती का सीना फाड़ कर बाहर आता है
और विशालकाय वृक्ष बन जाता है।
जिजीविषा सीखनी है तो
सीखिए प्रकृति से
जहां हर रात के बाद प्रकाशमय सुबह,
पतझड़ के बाद बहार,
ओर सूखे के बाद बारिश की फुहार।
जिजीविषा सीखनी है तो
सीखिए नन्हें मुन्ने बच्चों से
जो जीवन के स्वर्णिम दिनों के
आनंद में झूमते गाते हैं।
जिजीविषा सीखनी है तो
सीखिए अपने आप से
क्योंकि तुम भी मुश्किलों को कई
बार धूल चटाकर आगे बढ़ते आए हो।
प्राची डिमरी
Superb 👌👍
ReplyDeleteYour writing is fab✨
ReplyDeleteBahut sundar ✨👍👍
ReplyDeleteGreat 👌✨
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