गणित और जिंदगी
हर सवाल का उत्तर उसे हल करने से ही आता है, फिर हो गणित या जिंदगी यह प्रक्रम ऐसे ही चलता जाता है। शून्य से शुरू होकर, शून्य पे ही खत्म हो जाता है। गणित हो या जिंदगी हर बार कोई प्रमेय ही काम आता है। छोटी छोटी बातों की भी बड़ी महत्ता होती है, गणित और जिंदगी हमें यह हर बार सिखा देती है। बोडमास का सूत्र हो या हो पाईथागोरस का प्रमेय, अच्छाई का जोड़ करने से आनंदित हो जीवन शेष। चुनौतियां तो होती ही हैं जीवन रूपी वृत्त का केंद्र, मुस्कुराहट को त्रिज्या बनाकर, हासिल करे परिमाप विशेष। मुश्किलों के दशमलव को प्रयासों के गुणा-भाग से हटाते जाएंगे। गणित हो या जीवन समाधान की ओर हमेशा बढ़ते जाएंगे। जीवन और गणित मुझे दोनों एक से नज़र आते हैं। जीवन भी एक गणित ही है, यह समझ कर हम जीवन के और निकट आजाते हैं।