"विश्व कविता दिवस 2024"( कविता: विचारों की लहर और भावों की सरिता।)
"कविता"
लिखने के लिए जब मैंने कलम उठाई,
तब विचारों की आपाधापी ने भी दौड़ लगाई,
एक विचार इधर से आता,
एक विचार उधर को जाता,
कभी सोचती ये लिख लूं मैं,
कभी सोचती वो लिख लूं मैं,
कभी ख्वाब....तो कभी भाव लिखती,
कभी खुशी .... तो कभी चैन लिखती,
कभी सोचती हूं... छोड़ दूं इसको आधे में,
तभी सोचती कैसे होगी पूर्ण यदि
छोड़ दिया इसको आधे में....
मैं अपनी इस दुविधा से जब उपर उठी,
अपने इस टाल मटोल के चक्कर से जब आगे बढ़ी,
सच कहती हूं....
तब मैंने एक कविता रची...
तब मैंने एक कविता रची....
जिसे आज बरसो बाद पढ़ कर
यकीन न हुआ की.....
क्या यह सुचमुच मैंने लिखी...!
प्राची डिमरी
सभी कविता प्रिय पाठकों को विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!
अतिसुंदर
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