पुस्तक समीक्षा ( जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य ) ।

विक्टर ई. फ्रैंकल द्वारा लिखित तथा वॉव (Wow) पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक Man's Search for Meaning अर्थात् 'जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य' लेखक और उसके साथियों के उस संघर्ष को दर्शाती है जो उन्होंने जर्मनी के निर्दयी शासक हिटलर के आश्विज तथा नाज़ी शिविरों में जीवित रहने के लिए किया। पुस्तक में बंदी शिविर के भयावह अनुभवों के साथ साथ लोगोथेरेपी का संक्षिप्त वर्णन तथा 'ट्रैजिक ऑप्टिमिजम' यानी दुखद आशावाद पर भी चर्चा की गई है। 
   जहां आज के समय में हर एक व्यक्ति अपने जीवन का उद्देश्य या यूं कहे की अपने जीवन का 'क्यों' ढूंढना चाहता है ऐसे में यदि हम इस पुस्तक के माध्यम से लेखक की सुने तो उनका यही कहना है की यदि हमारे 'जीवन का क्यों हमें पता है तो हम किसी भी प्रकार के कैसे को सहन कर सकते हैं  फिर वह क्षणिक हो या दीर्घकालिक'। 
    लेखक के अनुसार अपने जीवन के अर्थ की तलाश करना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा कार्य है। लेखक ने बंदी शिविर के प्रथम दिवस से लेकर, बंदियों के मनोविज्ञान, शिविर में जिंदा रहने के लिए किए गए संघर्षों, भरपेट भोजन की कमी, घर की एक झलक पाने की व्याकुलता, बंदियों की दुर्बलता का उनके जीवन के साथ आध्यात्मिकता, कला, भाग्य तथा भविष्य हर एक पहलू की बखूबी से चर्चा की गई है।
   मानव स्वभाव को अधिक गहराई तक समझने, अपने मनोविज्ञान को समझने तथा अपने अस्तित्व की समझ को परिपक्व और गहरा करने के इच्छुक व्यक्ति को यह पुस्तक निश्चित रूप से पढ़नी चाहिए। पुस्तक में मात्र घटनाएं दर्ज नहीं हैं बल्कि यह लेखक के अपने कठोर अनुभव है जो भाग्य से नाज़ी कैंप से जीवित लौटकर वापस आ पाए। उनके अनुभव निश्चित ही किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन को समझने में कारगर सिद्ध होंगे।उम्मीद है आप यह पुस्तक ज़रूर पढ़ेंगे।

प्राची डिमरी  

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