पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण संरक्षण एक ऐसा विषय जिसके बारे में सुनना हमारे लिए एक आम बात हो गई है। बचपन से और आज तक, बच्चों से लेकर बड़ों तक हम सभी भली भांति जानते हैं की पर्यावरण संरक्षण क्या है और इसकी कितनी महत्ता है लेकिन क्या हम व्यक्तिगत रूप से इस पर अमल करते हैं? क्या अपने व्यक्तिगत स्तर पर कोई कदम उठाते हैं? वैश्विक स्तर पर भले ही कितनी ही बातें, समझौते और सम्मेलनों का आयोजन किया जाए।किन्तु वास्तव में जब तक हम में से प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर जागरूक और जिम्मेदार नहीं होगा तब तक कुछ भी पूर्ण रूप से कारगर साबित नहीं हो सकता।
   जब भारत की बात करते हैं तो यहां की विविधता, यहां की संस्कृति, और यहां की जीवनशैली हमें हमेशा
पर्यावरण और उससे जुड़ी हर एक वस्तु की रक्षा करने का संदेश देती है। हमारे प्राचीन शास्त्रों से लेकर हमारी विभिन्न जनजातियां आज भी पर्यावरण को पूजते हैं।
वृक्ष हो, पशु हो, सूर्य हो या चंद्रमा इन सबकी आराधना करना भी एक प्रकार से हमें इनके संरक्षण करने की ओर ही इंगित करता है।   
   बात शास्त्रों की हो, विज्ञान की हो या फिर हमारी दैनिक दिनचर्या की, पर्यावरण संरक्षण के हर क्षेत्र में अपने मायने हैं। पर्यावरण संरक्षण तभी हो सकता है जब हम प्रकृति की प्राकृतिकता के साथ खिलवाड़ करना छोड़ कर उसमें संतुलन बनाए रखें और जब बात आती है संतुलन की तब पृथ्वी पर उपस्थित एक जीव का अस्तित्व भी महत्वपूर्ण हो जाता है। पृथ्वी पर जैव विविधता का बने रहना आवश्यक हो जाता हैं। सूक्ष्मजीवों से  लेकर विशालकाय प्राणी हर किसी की अपनी एक भूमिका है। यह पृथ्वी हर एक प्राणी का घर है इस पर केवल हम मनुष्यों का एकाधिकार समझना पूर्ण रूप से गलत है। अपनी दैनिक गतिविधियों पर अमल करके उन्हें सही तरह से करें तो निश्चित ही हम  पर्यावरण सुरक्षा में हम अपना योगदान बखूबी निभा सकते हैं।


प्राची डिमरी 

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