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Showing posts from June, 2023

बालश्रम

                     बालश्रम जीवन की किताब का सुंदर अध्याय होता है बचपन, भविष्य की इमारत की नींव होता है बचपन। हमारी उभरती तस्वीर का कैनवास होता है बचपन, हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार होता है बचपन। फिर क्यों आज भी कई बच्चों का बचपन छीन जाता है, खेल खुद से दूर क्यों बालश्रम में बंध जाता है। नासमझी की बाल उमर में न जाने क्या क्या झेलते हैं, काम के बोझ तले वो खुद को भी खो देते हैं। जीवन का सुंदर अध्याय नहीं रह जाता अब सुंदर, मौज मस्ती, खेलकूद छोड़ याद आता बस बालश्रम। छोटी से उस उमर में वे बड़ों सी मेहनत करते हैं, बचपन के वे काले साए उनके भविष्य पर भी पड़ते हैं, उस निर्मल मन में न जाने क्या-क्या प्रश्न उठते होंगे, समाज की इन कुरीतियों से न जाने कितने मासूम प्रभावित होते होंगे, उनकी आंखों से बहा हर एक आंसू समाज के लिए श्राप है, उनका बचपन छिनने वाला समाज सबसे बड़ा गुनेहगार है।   सपने उनके भी थे बड़े बड़े, जिनको हम सबने ही तोड़ा है। अपने बच्चे का बचपन संवार कर, किसी और का बचपन छीना है। दीमक की भांति यह कुरीति समाज को ही चाटेगी,  व...

बेवजह की व्यस्तता में लुप्त होती अदभुत्ता।

जिंदगी छोटी छोटी घटनाओं का एक बड़ा संग्रह है। लेकिन जब बढ़ती व्यस्तता में हम इन छोटी चीजों का महत्व खो रहे हैं तब कहीं न कहीं हम जीवन में समाहित अदभुता को भी खोते जा रहे हैं। क्या अपने कभी सोचा है की व्यस्तता भरे इस दौर में आप अपने खुद के लिए कितना समय बचा पाते हैं? हाल तो अब कुछ इस कदर हो गया है की चाहे हम दिन भर भी खाली हो तब भी अपने लिए वक्त की कमी ही पाते हैं। न जाने यह व्यस्तता के मारे है या फिर हमारे अपनी अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण, कारण जो भी हो पर यह हमें जीवन के गहरे उतरने, जीवन को समझने से निश्चित रूप से बाधित कर रहा है।    हम इसी छ्दम व्यस्तता के कारण लम्हों को जीते नहीं बल्कि मात्र काटते चले जाते हैं। और तो और कभी कभी तो अपनी खुशियों का भी पूरी तरह आनंद नहीं ले पाते हैं और उन्हें भी भविष्य के लिए संरक्षित कर देते हैं की जब वो क्षण आएगा, जब मेरे पास वक्त होगा तब मैं पूरा आनंद लूंगा। लेकिन यह हमें उन अमूल्य क्षणों से हमेशा के लिए दूर कर देता है। जो शायद कभी लौटकर वापस भी नहीं आ सकते।       जीवन की हर छोटी चीज विलक्षण होती है किंतु यह जानने मे...