मदर्स डे
किसी भी व्यक्ति को ईश्वर द्वारा मिला एक अनमोल तोहफ़ा जीवन होता है और जिसका जरिया होती है मां।
मां शब्द लिखने में जितना आसान है उसकी वास्तविकता और महत्व उतना ही विशाल और गहरा है।
मनुष्य हो या कोई भी जीव हर किसी के जीवन में उसकी मां की सबसे बड़ी भूमिका होती है। मनुष्य के एक सामाजिक प्राणी होने के नाते हम अनेक रिश्तों और संबंधों से जुड़ जाते हैं किंतु मां और बच्चे का संबंध सदैव अद्वितीय ही रहता है। जो जुड़ाव और लगाव इस रिश्ते में होता है वह शायद ही किसी और के साथ होता है।
व्यक्ति जीवन के किसी भी पड़ाव या उम्र के किसी भी दौर पर पहुंच जाए मां का प्रेम हमेशा उसके लिए निश्छल ही बना रहता है। हमारे जीवन के शुरुआत से लेकर हमारी हर एक उपलब्धि में हमसे जुड़े सभी लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है किंतु मां का योगदान फिर भी अन्य लोगों से सर्वोपरी है। मां का हमारे लिए खुद को भूल जाना। अपने जीवन से भी अग्रणी महत्व हमें देना। अपनी सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए भी हमारी हर एक तमन्ना को पूरा करना। हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनों को पीछे छोड़ देना।
मां का त्याग और मां की ममता को हर इंसान बखूबी जानता है। यह स्वयं में अवर्णिय है।
किन्तु आज भी जहां एक ओर मां की ममता का गुणगान होता है तो दूसरी ही ओर कई सारे बच्चे अपनी माताओं को वृद्धा आश्रम में छोड़ने का घृणित कृत्य करते देखे जाते हैं। वे अपने जीवन में इतना खो जाते है की जिसने उन्हें जीवन दिया उसे ही भूल जाते हैं और उसे ही अपने जीवन से बेदखल कर देते हैं।
वहीं दूसरी ओर कभी कभी हम उनके जीवन और सलतम बनाने की चाह में उन्हें सारी सुविधाएं तो उपलब्ध करा देते हैं किंतु जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत और चाह होती है उन्हें वह देने से चूक जाते हैं जो है उनके लिए हमारा वक्त। जिस पर पहला हक हमेशा उनका ही है।
दूसरी ओर यदि बात करें पेरेंटिंग की तो भारत में भले ही अब पेरेंटिंग में माता-पिता दोनों ही बराबर की भागीदारी निभाने लगे हैं किंतु आज भी कुछ हद तक कहीं न कहीं बच्चों के लालन-पालन में मां ही अधिकतर भागीदारी देती है। फिर वो चाहे अपने कैरियर के साथ समझौता करना हो या अपने प्रोफेशनल जीवन के साथ तालमेल बैठाना हो। किसी औरत का मां बनते ही वह दुगनी जिम्मेदारियों और चुनौतियों से जूझने लगती है। उसे व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से भी कई बदलावों से गुजरना पड़ता है। पर इस के बावजूद भी वह हर एक जिम्मेदारी को पूर्ण रूप से निभाती है और खुद के साथ साथ सबको समेटकर एक साथ आगे बढ़ती जाती है।
मां के त्याग,ममता और प्रेम को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। मां का पूरा वर्णन करना भी आसान नहीं है। किंतु उनके महत्व को याद दिलाने के लिए मदर्स डे जैसे दिनों की भी अपनी अलग ही उपयोगिता है।
हैप्पी मदर्स डे !
प्राची डिमरी
Beautiful ❣️❣️
ReplyDeleteबहुत सुंदर 👌👌👌
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