लघु यात्रा वृतांत : तुंगनाथ की यात्रा।
बात पिछले साल यानी नवंबर की है हमारी कक्षा के सभी छात्र छात्राओं ने अपने ही नजदीकी प्रकृति से जुड़े किसी स्थान घूमने का तय किया। यूं तो हमारा उत्तराखंड चारों ओर से ही प्रकृति से घिरा हुआ है किंतु यदि प्रकृति के साथ आध्यात्म का मिलन हो जाए तो शांति की प्राप्ति निश्चित ही है। इसी आध्यात्म की तलाश और दोस्तों के साथ हम सब भी निकल पड़े तुंगनाथ । सुबह 6 बजे निकले और कब वहां पहुंचे पता ही नहीं चला। वक्त ने मानों उस दिन हम से दुगनी रफ्तार से दौड़ लगाने की ठानी हो। बस की खूब मस्ती, गप्पबाजी, गीत संगीत का भरपूर आनंद उठाते हुए जब हम तुंगनाथ पहुंचे तो वहां की सर्द हवाओं ने मानो हमें हिमालय का अनुभव करा दिया हो। वहां पहुंचते ही जैसे ही हम पैदल ट्रैक पर आगे बढ़ते गए एक अनोखे सुकून , प्रकृति की अनोखी छटा और बहुत सारे खूबसूरत नजारों से हम सभी अभिभूत थे। हम सभी वहां के हर एक खूबसूरत नज़ारे को बस तस्वीरों में कैद कर लेना चाहते थे ताकि जब भी उन तस्वीरों को देखें तो एक बार फिर प्रकृति की रूहानियत में विचरण कर आए। चलते चलते जब हम मंदिर प्रांगण में पहुंचे तो वहां की शांति और ऊ...