शिव

प्राचीन काल से ही हमारा देश भारत अपनी विविधता में एकता के लिए प्रसिद्ध है फिर चाहे यह विविधता सांस्कृतिक हो या आध्यात्मिक, हमारे जीने के तरीकों में हो या परमात्मा से जुड़ने के तरीकों में हो या फिर परमात्मा के अलग-अलग रूपों को पूजने के तरीकों में हो। हमारे देश भारत में अलग-अलग मान्यताओं के अनुरूप लोग अलग अलग देवों की पूजा-अर्चना अलग-अलग ढंग से करते हैं इन्हीं रूपों में से एक रूप है शिव, शिव यानी कल्याण, शिव यानी प्रकृति, शिव यानी योगी, शिव यानी संतुलन, शिव यानी अनंत। जहां एक और विष धारण है तो वहीं दूसरी ओर चंद्रमा की शीतलता भी है। प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता बाघाम्बर है तो शक्ति का साथ भी है।
    वास्तव में देखा जाए तो किसी भी देव की आराधना करना एक प्रकार से प्रकृति की आराधना करना है। शायद यह प्रथा ही प्रकृति ने पैदा की हो ताकि प्रकृति की रक्षा हो सके और मनुष्य के मन में एक भय की भावना भी बची रहे। शिव का अर्थ कल्याण होता है और यह तभी संभव है जब केवल धरातल पर आराधना छोड़ थोड़ी गहराई में जाने की कोशिश करे। जीवन में कल्याण का मार्ग संतुलन और योग ध्यान से होकर ही गुजरता है। किसी भी देव की पूजा करना या उसका ध्यान करना तभी लाभकारी है जब हम गहराई से उनके जीवन को भी समझने की कोशिश करें, जानने की कोशिश करें की क्या ईश्वर होने के बावजूद इन्होंने भी चुनौतियों का सामना किया। क्या ईश्वर होने के बाद भी इन्हें भी दुखों का सामना करना पड़ा?
    देवों के देव महादेव का जीवन भी हमें यहीं सीख देता है की जीवन आसान कभी नहीं होता इसे आसान बनाना पड़ता है। कठिनाइयां वेश बदलकर भी आएं पर यदि हमारा हृदय निर्मल और शांत हो तो हम उनसे पार पा जायेंगे। जीवन में बड़ी उपलब्धियों के लिए हमें छोटेे- छोटे त्याग तो करने ही पड़ते हैं। 
    नीलकंठ भगवान शिव के स्वरूप की हर सूक्ष्म वस्तु हमें बहुत कुछ सिखाती भी है और बताती भी है। भगवान शिव का जीवन कला की महत्ता पर भी प्रकाश डालता है। नटराज कहे जाने वाले शिव सभी कलाओं के स्वामी हैं जिनके डमरु से संगीत का और तांडव से नृत्य का जन्म हुआ। यह कहीं न कहीं हमें भी कला   
की ओर उन्मुख होने और उसकी महत्ता को समझने के लिए बाध्य करता है। तो दूसरी ओर सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा के अक्षर भी शिव के डमरु से ही जन्में हैं।
   आदियोगी शिव शंकर ने सृष्टि को योग का वरदान भी दिया जिसका साक्ष्य सिंधु घाटी सभ्यता से मिली मुहर में भी मिला है।
    अंततः देखा जाए तो भगवान शिव का जीवन और व्यक्तित्व हमें एक संतुलन भरे जीवन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं जिसमें प्रकृति और कला का भी अपना विशिष्ठ स्थान हो।

प्राची डिमरी

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