माँ ❤️
माँ नहीं रूकती, माँ नहीं थकती, बस चलती जाती है उस गाड़ी की तरह जो घर के हर सदस्य को उसकी जगह तक पहुंचाती है, सुबह होते ही घर के किसी भी कोने में बैठे, हर किसी के लिए मौजूद होती है, मानो घर की सुबह हो या सुबह की धूप हो दोनों ही माँ के उठने का ही इंतजार करती हो, दिन भर बस घर और उसके लोगों के बीच इतना पिस जाती है कि वो खुद को ही भूल जाती है, सबके काम वक्त से करने के चक्कर में, अपने लिए वक्त बचाना ही भूल जाती है, गर्मी हो,सर्दी हो धूप हो या हो बारिश, माँ फिर भी हर दम, हर क्षण हमारे लिए मौजूद रहती है, बिना किसी शिकायत और गीले शिकवों के.... माँ हमारे जीवन का अमूल्य ख़ज़ाना होती है, सच में हर माँ अद्भुत और अद्वितीय होती है।❤️ प्राची डिमरी