शहर कुछ कहता है...!
इस शहर की खुशबू तुम हो, तुमसे महकता है ये शहर, इन वीरान कमरों में, जो तुम अपनी मेहनत का शोर भरते हो, हां सच में इसी से तुम इस शहर की आवाज़ बनते हो, जब चले जाते हो अपने अपने घरों को, तो यहां का खालीपन चिल्ला चिल्ला कर तुम से कहता है की... जल्दी आओ.... यहां की चमक और दमक मुझे लौटाओ, त्योहारों के सूनेपन को भरने तुम तो गांव हो आते हो... पर यहां के गली मोहल्लों की दुकानों के सूनेपन काक्या? तुम्हारे जाने का सूनापन मुझे बहुत खलता है, तुम जल्दी आओ...और मुझे लौटा दो वही भरा पूरा श्रीनगर, जो बस तुम्हारे होने से है, तुम मुझे लौटाओ मेरी चमक... जो तुम से... तुम बस जल्दी आओ..! प्राची डिमरी (श्रीनगर शहर की खूबसूरती और पहचान यहां के विद्यार्थियों के लिए की किस तरह सूना पड़ जाता है यह शहर जब सब विद्यार्थी त्योहारों पर घर चले जाते है।वास्तव, में यहां की चमक और दमक हम ही से है।)